कुछ सवाल आपसे.........., कुछ अपने आप से......?
देष के दो मामलों को लेकर मैं काफी कुछ सोच समझ रहा हूं लेकिन फिर भी सही क्या है यह फैसला ले पाने में असमर्थ हूं
देष के दो मामलों को लेकर मैं काफी कुछ सोच समझ रहा हूं लेकिन फिर भी सही क्या है यह फैसला ले पाने में असमर्थ हूं
पहला - अरविन्द केजरीवाल का मामला, जिसे हर दूसरे-तीसरे दिन थप्पड़ व घुसे खाने पड़ रहे हैं। यह सवाल है देष की उस जनता से जो कि केजरीवाल कि ठुकाई केवल इस लिये कर रही है, क्योंकि उसने किया वादा पुरा नहीं किया ? हॉ मुझे यह लगता है कि केजरीवाल से लोगों की अपेक्षाएं जुड़ी हुई थी और केजरीवाल ने मुख्यमंत्री बनने का फैसला ही गलत लिया था, जब उन्हें पता था कि उनकी बातों को उनकी सरकार को समर्थन देने वाली दल नहीं मानेगी तो फिर उन्हांेने मुख्यमंत्री बनना और सरकार गठन का निर्णय ही क्यों लिया? यह केजरीवाल की गलती थी 100 प्रतिषत सच है। किन्तु क्या एक गलती के लिये किसी को इतनी बार प्रताड़ित किया जाता रहेगा कि अब कोई अण्णा हजारे और केजरीवाल भ्रष्टचार के खिलाफ आवाज़ न उठा सके। यहां भी मेरे इस बातों से कई लोगों की भावनाओं को ठेस लगेगी और अपनी बयानबाजी करेंगे, लेकिन उनको मैं यह भी कहता हूं कि हां केजरीवाल ने सब ड्रामा केवल वाहवाही पाने को और अपने आप को फेमस करने टीवी और समाचार पत्रों में सुर्खियों के लिये किया, इसी लिये वह भ्रष्टाचार के खिलाफ आया। लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि हर दिन आप किसी को थप्पड़ और घूसों से मारते रहें। जब देष की उस जनता को जो इस तरह की हरकत कर रही है देष कि इतनी ही फिक्र है तो फिर वे उन नेताओं के साथ ऐसा ही व्यवहार क्यों नहीं करते जो कि घोषणा करके, घोषणा पत्र जारी करके अपने वादों को ही भूल जाते हैं। लगातार भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, जानकारी होने पर भी यहीं समाज और यहीं आम जनता उनकी जय जयकार करती है, उनकी चाटुकारिता करती है, महज चंद रूपयों के लिये चुनावों में अपने वोट को बेच देती है, यदि वास्तव में देष भक्ति है तो फिर अरविन्द केजरीवाल की तरह वादा करके वादा पुरा नहीं करने वाले कई नेता हैं उनकी ठुकाई कबसे करेगी यह जनता या फिर 60-70 सालों के इस देष के लोकतंत्र में केवल और केवल केजरीवाल ही झूठे और धोखेबाज हैं ?
दूसरा - दूसरा सवाल सहारा के सुब्रत राय से जुड़ी मामले पर है। शायद मेरी इस बातों से माननीय उच्चय न्यायालय का अपमान हो अथवा उनकी गरिमा को ठेस पहुंचे लेकिन जो सच है उसे कहने में गुरेज कैसा। सहारा श्री पर आरोप है कि उन्होंने हजारों करोड़ रूपये लोगों के अपने पास फिक्स डिपाजिट तथा अन्य मदों में अपने पास जमा करायें हैं और वे उसे नहीं दे रहे हैं। जबकि नहीं देने वाले मामले मेरी नज़रों में शायद कम ही होंगे। क्योंकि अम्बिकापुर में भी एक सहारा का कार्यालय है जहां पर बैंक से संबंधित कार्य होते हैं। लेकिन कई सालों से कई एजेन्ट इस तरह के कार्य कर रहे हैं और लोगों को समय पर बताये अनुसार पैसा भी मिल रहा है, इक्का-दुक्का एजेन्ट यदि रूपये का गबन कर दे तो यह मामला अलग हैं, किन्तु ऐसे मामले बहुत कम हैं, जिसमें कंपनी ने किसी का पैसा नहीं दिया। यदि सहारा बिना लायसेंस के अथवा अन्य कानूनी प्रावधान अपनाये बिना इस तरह की कार्य कर रही थी तो उस समय देष की सरकार, देष की तमाम एजेंसी अथवा खुद वह सर्वोच्च न्यायालय कहा था जब इस तरह का साम्राज्य सहारा द्वारा स्थापित किया जा रहा था? यह एक-दो दिन में तो नहीं हुआ वर्षों लगे हैं इसे होने में, इसके बाद भी यदि कोई रूपये देने के लिये किष्तों में तैयार है तो उसे जेल में रखना है, यह देष का कानुन और हमारा सर्वोच्च न्यायालय कहता है, जिसका देषवासी सम्मान्न करते हैं। किन्तु वहीं ऐसे कंपनी जो लोगों को महिनों, छह महिनों एवं वर्ष भर में रूपये लेकर दुगुना-तीन गुना तक करने का झांसा देते हैं और कई तरह के लाभ बताकर साल-छह महिने में भाग जाते हैं, उन पर क्या कार्यवाही हो रही है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय मेरा आपसे अनुरोध है कि ऐसे कंपनी जो लोगों के पैसे लेकर भाग रहे हैं, लोगों करोड़ों-अरबों बरबाद हो गये उनको अब पैसा कौन देगा तो मेरा आपसे अनुरोध है कि इसे आप सरकार के जरिये दिलायें अथवा आप इस प्रष्न का उत्तर दें कि जब ऐसी कंपनीयां देष में संचालित होती हैं तो देष का कानून और प्रषासन अन्य एजेंसी क्या कर रही होती हैं, जबकि ऐसे मामलों पर हमेषा ही समाचार पत्रों में कई समाचार दिखाई देते हैं, ऐसे समय में आपने स्वयं ही संज्ञान क्यों नहीं लिया। यदि आप ऐसे मामलों पड़ताल करेंगे तो लगभग हर राज्य में ऐसी कंपनियों का जाल फैला हुआ है जो कि लोगों को लुटने में और लुट कर भागने में विष्वास करती हैं, ऐसी परिस्थितियों में यदि सहारा ने भी यही किया होता तो आज आप पैसे देने के लिये किसे मजबुर करते । क्या यह देष के कानून और सरकारी तंत्र का दोहरा मापदण्ड नहीं है ?

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें